खेलो में राजनीति है राजनीति का खेल

वर्षो पहले खेल को एक मनोंरजन के साधन के रूप में इजाद किया गया था | पर वर्तमान युग में खेल ना केवल लोगो के लिए मनोरंजन का साधन है अपितु पैसे कमाने का पर्याय भी है | खेल कोई भी हो उसके संगठन में उच्च पद पर ज्यादातर राजनेता ही राज कर रहे है | विभिन्न केंद्र और राज्य के खेल संगठन जैसे की कुश्ती संघ हो, ओलिंपिक संघ या भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड सभी में राजनेता अपने पैर पसारे हुए है |

दुःख इस बात का है की राजनेता उस खेल और खिलाडियों को नियंत्रित करते है जिस खेल को उन्होंने शायद कभी खेला भी न हो | ऐसे लोगो के हाथो में खेल और खिलाडियों की जिम्मेदारी सौंपना किसी नादान बच्चे को गाडी चलाने को देने के बराबर होता है |

आज खेल कुछ लोगो के लिए सिर्फ एक व्यवसाय बनकर रह गया है | कई बड़ी बड़ी कंपनीयों ने खेल आयोजन में करोड़ों रूपये खर्च करके टीम खरीदी और अच्छा खासा पैसा कमा रहे है |

व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए कई योग्य खिलाडियों को मौका ना देकर अयोग्य खिलाडियों का चयन करना इस तरह के कारनामे कई बार किये जाते है | भाई-भतीजावाद और सिफारिशे यहाँ पर भी भारी है जिसका दुष्परिणाम ये होता है की कई खेलो में भारत अभी भी फिसड्डी है |

कई बार राजनीती के अच्छे अच्छे खिलाडियों को मोहरा बनना पड़ता है | पिछले साल नरसिंह यादव और सुशील कुमार दोनों ने ओलिंपिक में जाने के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी और दोनों का झगड़ा कोर्ट तक पहुँच गया था | इस झगड़े का मुख्य कारण राजनीति ही थी |

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2016 के ओलिंपिक में जिमनास्टिक दीपा करमाकर फाइनल राउंड में पहुंची थी पर बस (0.150) के मामूली अंतर से कांस्य पदक से चुक गई थी | ये जिमनास्टिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली 52 साल में पहली खिलाडी थी | पर आपको ये जानकर हैरानी होगी की इन्हें इस मुकाम तक पहुँचने के लिए सरकार द्वारा कोई खास सुविधा उपलब्ध नही कराई गई थी ये अपने दम पर यहाँ तक पहुंची थी | तो जरा सोचिए भारत की ना जाने कितनी ऐसी दीपा करमाकर है जिन्हें अगर सरकार से थोडा भी प्रोत्साहन मिले तो वे देश के लिए बहुत कुछ अच्छा कर सकती है |

इन सब कमियों को दूर करने के लिए सरकार को एक व्यवस्थित ढांचा तैयार करना पड़ेगा और जमीनी स्तर तक खेल प्रतिभाओ को खोजकर उनको आगे बढ़ाने के लिए जवाबदेही तय करनी पड़ेगी साथ ही खेल संगठनो में प्रमुख रूप से उस खेल से जुडी हस्तियों को पद दिए जाए ताकि वे अपने अनुभव से उस खेल संगठन को सुचारू रूप से चला पाए और सारे खिलाडियों को मुलभुत साधन उपलब्ध कराए जाएँ |

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