नमन है भारतीय सेना के जवानों को

  आज अगर हम सुरक्षित तरीके से चैन की नींद सो पा रहे है, कहा रहे है और काम कर रहे है तो इसका श्रेय जाता है हमारे देश के जवानों को | जो पता नही समय पर खाना कहा पते है या नही नींद पूरी क्र पते है या नही पर हम अपनी जिन्दगी आराम से चैन के साथ गुजार रहे है | निचे कुछ लाइन्स लिखी गई है जो भारतीय सेना के जवानों को समर्पित है – एक पल…. उनके लिए…. Indian Army Reckontalk.com आप सोलह घंटे काम…

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यह कहानी जितनी बार पढे उतना कम ही है। पढ़ने के बाद जीवन के प्रति आपका नज़रिया बदल जायेगा!

  एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं … उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी बरनी ( जार ) टेबल पर रखा और उसमें टेबल टेनिस की गेंदें डालने लगे और तब तक डालते रहे जब तक कि उसमें एक भी गेंद समाने की जगह नहीं बची … उन्होंने छात्रों से पूछा – क्या बरनी पूरी भर गई ? हाँ … आवाज आई … फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने छोटे – छोटे कंकर उसमें भरने…

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जाने हिंदी साहित्य के गुरु रबिन्द्रनाथ टैगोर के बारे में

रबीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई, 1861 को कलकत्ता के प्रसिद्ध जोर सांको भवन में हुआ . ‘रबिन्द्रनाथ टैगोर’ का जन्म कलकत्ता के धनी परिवार में हुआ था। पिता देबेन्‍द्रनाथ टैगोर (देवेन्द्रनाथ ठाकुर) ब्रह्म समाज के नेता थे। भारत का राष्ट्र-गान टैगोर की देन है। 

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डेन ब्राउन कि रोमांच से भरी एक और कहानी

  द दा विंची कोड, एंजल्स एंड डेमन्स, द लॉस्ट सिंबल और इन्फर्नो जैसे थ्रिलर उपन्यासों के बाद यह लैंगडन का पांचवा थ्रिलर उपन्यास होगा.   उपन्‍यासों के महारथी डैन ब्राउन अपनी अगली थ्रिलर उपन्यास ‘ओरिजिन’ में एकबार फिर पाठकों को रोमांचित करेगा. उनका यह उपन्यास अगले साल 26 सितंबर से बाजार में आ जाएगा.   ब्रिटेन में लंबे समय से ब्राउन के संपादक और ट्रांसवर्ल्ड पब्लिशर्स के प्रकाशक बिल स्कॉट-केर ने कहा – “पिछले 15 साल से डैन ब्राउन की अदभुत किस्सागोई और ऐतिहासिक पुर्नव्याख्या को प्रकाशित करना मेरा सौभाग्य…

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अकबर-बीरबल का रोचक किस्सा : मूर्खों से मिली बुद्धि

सम्राट अकबर कभी जरूरत से, कभी मनोरंजन के लिए बीरबल से कठिन प्रश्न करता।   एक दिन बादशाह ने पूछा- ‘तुम्हें तीक्ष्ण बुद्धि कहां से मिली?’   बीरबल- ‘जहांपनाह, यह मुझे मूर्खों से मिली है!’   प्रश्न जितना सरल, उत्तर उतना ही ज्यादा उलझन और चक्कर में डालने वाला, हैरान करने वाला! मूर्ख के पास तो बुद्धि होती ही नहीं, बुद्धि होती तो वे मूर्ख क्यों कहलाते। और जो चीज जिसके पास में नहीं है, उसे वे कैसे दूसरे को दे सकते हैं? अत: अकबर से रहा नहीं गया।   …

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‘मैं रथ का टूटा हुआ पहिया हूं, लेकिन मुझे फेंको मत’

मैं रथ का टूटा हुआ पहिया हूं लेकिन मुझे फेंको मत!   क्या जाने कब इस दुरूह चक्रव्यूह में अक्षौहिणी सेनाओं को चुनौती देता हुआ कोई दुस्साहसी अभिमन्यु आकर घिर जाय!   अपने पक्ष को असत्य जानते हुए भी बड़े-बड़े महारथी अकेली निहत्थी आवाज़ को अपने ब्रह्मास्त्रों से कुचल देना चाहें   तब मैं रथ का टूटा हुआ पहिया उसके हाथों में ब्रह्मास्त्रों से लोहा ले सकता हूं!   मैं रथ का टूटा पहिया हूं   लेकिन मुझे फेंको मत इतिहासों की सामूहिक गति सहसा झूठी पड़ जाने पर क्या…

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अशोक चक्रधर का हास्य व्यंग: ससुर उवाच

डरते झिझकते सहमते सकुचाते हम अपने होने वाले ससुर जी के पास आए, बहुत कुछ कहना चाहते थे पर कुछ  बोल ही नहीं पाए।   वे धीरज बँधाते हुए बोले- बोलो! अरे, मुँह तो खोलो।   हमने कहा- जी. . . जी  जी ऐसा है  वे बोले- कैसा है?   हमने कहा- जी. . .जी ह़म हम आपकी लड़की का हाथ माँगने आए हैं।   वे बोले अच्छा! हाथ माँगने आए हैं! मुझे उम्मीद नहीं थी कि तू ऐसा कहेगा, अरे मूरख! माँगना ही था  तो पूरी लड़की माँगता सिर्फ़…

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झाँसी की रानी:एक ऐसी कविता जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते थे बचपन मैं!

सुभद्रा कुमारी चौहान (१६ अगस्त १९०४-१५ फरवरी १९४८) हिन्दी की सुप्रसिद्ध कवयित्री और लेखिका थीं। उनके दो कविता संग्रह तथा तीन कथा संग्रह प्रकाशित हुए पर उनकी प्रसिद्धि झाँसी की रानी कविता के कारण है। ये राष्ट्रीय चेतना की एक सजग कवयित्री रही हैं, किन्तु इन्होंने स्वाधीनता संग्राम में अनेक बार जेल यातनाएँ सहने के पश्चात अपनी अनुभूतियों को कहानी में भी व्यक्त किया। वातावरण चित्रण-प्रधान शैली की भाषा सरल तथा काव्यात्मक है, इस कारण इनकी रचना की सादगी हृदयग्राही है। यह रही आपके लिए सुभद्रा कुमारी चौहान की ये रोमांचित करने वाली कविता झाँसी की रानी…

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