मुख पृष्ठ / ट्रेंडिंग / अद्भुत / चूहें बेच के बना 100 करोड़ का मालिक

 

हर कंपनी को एक अच्छे कर्मचारी  की जरूरत होती है और ज्यादातर लोग अच्छे कर्मचारी के तौर पर ही अपने जीवन की इतिश्री करते हैं, लेकिन एक शख्स का मानना है कि अपने व्यवसाय को स्थापित करना न सिर्फ हर एक का अधिकार है बल्कि ये व्यवसायिक जीवन में उनकी पूर्णता का प्रमाण पत्र भी है।

 

अपने स्कूल जीवन से ही वो व्यावसायिक दृष्टिकोण के साथ जीवन के अलग-अलग पहलुओं को समझते रहे। उनके जीवन की एक घटना का जिक्र करते हुए वो कहते हैं कि बहुत छोटी उम्र में वो सफेद चूहों को हाट बाजारों में बेचने जाया करते थे। इस घटना का जिक्र इसीलिए जरूरी है क्‍योंकि व्यवसायिक सोच छोटी या बड़ी नहीं होती है। बाजार में जरूरत को पैदा कर अपने माल को बेचना एक अच्छे व्यवसायी की पहचान है। आज उनकी कंपनी 100 करोड़ के आंकड़े तक पहुंच चुकी है।

 

स्कूल और कॉलेज की एजुकेशन को वो कभी गंभीरता से नहीं ले पाए। उनका मानना है कि किताबी शिक्षा जरूरी तो है, लेकिन यहां व्यवहारिक ज्ञान की बहुत कमी है। आपको दोनों शिक्षाओं के बीच एक सामंजस्य बनाने की जरूरत है। जीवन से बड़ी पाठशाला कोई दूसरी नहीं होती और यहां वहीं पढ़ सकता है, जो सीखने का जुनून रखता हो। सीखने की प्रक्रिया में सफलता और असफलता के कोई मायने नहीं होते। हर असफलता दरअसल छद्म रूप में एक सफलता ही होती है क्‍योंकि इससे आप आगे की राह को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं।

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