मुख पृष्ठ / समाचार / नेशन / बढ़ी भारत की ताकत, नेवी ने समुद्र में उतारी 'खान्देरी सबमरीन'

 

स्कॉर्पीन श्रेणी की दूसरी पनडुब्बी आईएनएस खान्देरी का गुरुवार सुबह मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) मुंबई में जलावतरण किया किया गया। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे जलावतरण समारोह की अध्यक्षता की। उल्लेखनीय है कि खान्देरी शिवाजी महाराज के द्वीप किले का नाम है।

 

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमएसडीएल) में रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने इसे भारतीय नौसेना को सौपा। नेवी में शामिल करने के बाद इसके कई ट्रायल लिए जाएंगे फिर नौसेना के वार जोन में इसे जगह दी जाएगी। इस पनडुब्बी (सबमरीन) का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने फ्रांस के मैसर्स डीसीएनसी के साथ मिलकर किया है।

 

भारतीय नौसेना में पहली 'खांदेरी' पनडुब्बी 6 दिसंबर 1986 में कमीशन हुई थी और करीब 20 साल तक देश की सेवा करने के बाद 18 अक्टूबर 1989 डिकमीशन हुई थी।

 

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 'खांदेरी सबमरीन' रडार से बच निकलने में सक्षम स्वदेश निर्मित स्कॉर्पीन श्रेणी की दूसरी पनडुब्बी है। इससे पहले 'कलवरी' का जलावतरण और समुद्र परीक्षण हो चुका है। यह दुश्मन का पता लगते ही उस पर गाइडेड हथियारों से हमला करने में पूरी तरह से सक्षम है। यह पानी के नीचे से और जल के सतह से दोनों तरह से दुश्मन पर हमला कर सकती है।

 

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इस पनडुब्बी से तारपीडो के साथ-साथ ट्यूब से भी एंटी शिप मिसाइलें दागी जा सकती हैं। इसकी स्टैल्थ तकनीक इसे अन्य पनडुब्बियों के मुकाबले शानदार व बेजोड़ बनाती है। इस पनडुब्बी का इस्तेमाल अन्य किसी भी आधुनिक पनडुब्बी द्वारा किए जाने वाले विविध प्रकार के कार्यों के लिए किया जा सकता है। जैसे:- एंटी भूतल युद्ध, पनडुब्बी रोधी जंग, खुफिया जानकारी जुटाने, बारूद बिछाने, निगरानी रखना व अन्य।

 

गौरतलब है कि भारत दुनिया के उन कुछ देशों में शामिल है जो परंपरागत पनडुब्बियों का निर्माण करते हैं। भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट 75 के तहत एमडीएल में फ्रांस के मैसर्स डीसीएनएस के साथ साझेदारी में छह पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा भारतीय नौसेना की पनडुब्बी शाखा इस साल आठ दिसंबर को 50 साल पूरे करेगी।

 

आठ दिसंबर, 1967 को भारतीय नौसेना में पहली पनडुब्बी आईएनएस कालवरी के शामिल होने के साथ इस दिन हर साल पनडुब्बी दिवस मनाया जाता है। भारत पहली स्वदेश निर्मित पनडुब्बी आईएनएस शाल्की के शामिल होने के साथ सात फरवरी, 1992 को पनडुब्बी बनाने वाले देशों के विशेष समूह में शामिल हो गया था। खांदेरी नाम मराठा बलों के द्वीपीय किले के नाम पर दिया गया था जिसकी 17वीं सदी के अंत में समुद्र में मराठा बलों का सर्वोच्च अधिकार सुनिश्चित करने में बड़ी भूमिका थी।