कविताये | हिन्दीबाज
 dharamveer bharti

मैं
रथ का टूटा हुआ पहिया हूं
लेकिन मुझे फेंको मत!

 

क्या जाने कब
इस दुरूह चक्रव्यूह में
अक्षौहिणी सेनाओं को चुनौती देता हुआ
कोई दुस्साहसी अभिमन्यु आकर घिर जाय!

 

अपने पक्ष को असत्य जानते हुए भी
बड़े-बड़े महारथी
अकेली निहत्थी आवाज़ को

झाँसी की रानी:एक ऐसी कविता जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते थे बचपन मैं!

सुभद्रा कुमारी चौहान (१६ अगस्त 

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