हास्य व्यंग | Hindibaaj.com Leading Hindi Online Magazine
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सॉफ्टवेयर इंजीनियर चिरौंजी लाल, बचपन का नाम चुनमुन
जब से इंजीनियर बना है, रहता है गुमसुम गुमसुम
बचपन मे सुना था, इंजीनियर के जलवे होते हैं
पैसों पे सोते हैं, कई गाड़ी कई बंगले होते हैं
एक बार इंजीनियर बन गए, तो लाइफ बन जाती है
इतना पैसा मिलता है, आने वाली पीढ़ी बैठे बैठे खाती है
लोग इंजीनियर साहिब कहकर बुलाते हैं
इंजीनियर गोल्फ खेलते हैं टेनिस क्लब जाते हैं

डरते झिझकते
सहमते सकुचाते
हम अपने होने वाले
ससुर जी के पास आए,
बहुत कुछ कहना चाहते थे
पर कुछ 
बोल ही नहीं पाए।

 

वे धीरज बँधाते हुए बोले-
बोलो!
अरे, मुँह तो खोलो।

 

हमने कहा-
जी. . . जी 
जी ऐसा है 
वे बोले-
कैसा है?

 

हमने कहा-