सावन में क्या करे तो शिव जी जैसा पति और माता पार्वती जैसी पत्नी जरूर मिलेगी

 

श्रावण मास यानि भगवान शिव का प्रिय महीना, वर्षा ऋतु के प्रारंभ होते ही श्रावण शुरू हो जाता है। पूरे माह धार्मिक उत्सव जैसे शिवोपासना , व्रत, पवित्र नदियों में स्नान एवं शिव अभिषेक का महत्व होता है। खासतौर पर सावन में सोमवार के दिन की गई पूजा बहुत महत्वपूर्ण है। कई महिलाएं पूरे सावन महीने सूर्योदय के पहले स्नान कर उपवास रखती हैं। कुंवारी कन्या पूरे महीने उपासना एवं शिव पूजा करती हैं, एवं विवाहित महिलाएं अपने पति की मंगलकामना के लिए इन रीति रिवाजों का पालन करती है। इसीलिए हिंदी कैलेंडर में पांचवें स्थान पर आने वाला यह महीना पूरे भारत में सावन महोत्सव के रुप में मनाया जाता है और इस मास के प्रमुख देवता शिवजी हैं।

क्यों कुवारी कन्याएं अच्छे पति के लिए व्रत रखे

– कहा जाता है कि दक्ष पुत्री माता सती ने अपने जीवन को त्याग कर कई वर्षों तक श्रापित जीवन जिया।

– इसके बाद उन्होंने हिमालय राज के घर माता पार्वती के रूप में जन्म लिया।

– माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए पूरे सावन महीने में कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया।

– माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनकी मनोकामना पूरी की।

– सावन महीने को माता पार्वती और भगवान शिव के मिलन का महीना भी कहा जाता है। इसी वजह से कुंवारी कन्याएं अच्छे वर के लिए शिवजी की प्रार्थना करती हैं।

क्या है काँवर यात्रा

– काँवर एक बांस का बना हुआ ऐसा साधन है जिसमें दोनों तरफ छोटी सी मटकी टंगी होती है।

– इस मटकी में चल भरा होता है और बांस को फूल और घुंघरों से सजाया जाता है।

– सावन मास में लोग भगवा वस्त्र धारण कर पवित्र नदियों का जल इस काँवर में बांधकर पैदल चलकर शिवलिंग को चढ़ाते हैं।

– बोल बम का नारा लगाते हुए श्रद्धा पूर्वक पवित्र जल शिवलिंग को अर्पण करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

– जैसे सोमवार का व्रत महिलाओं द्वारा किया जाता है वैसे ही काँवर यात्रा पुरुषों द्वारा , इसलिए सावन का महीना स्त्री और पुरुष दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

– कहते है रावण ने सबसे पहले काँवर यात्रा की थी और भगवान राम ने भी एक कावड़ी के रूप में शिवजी पर जल चढ़ाया था।

कैसे करे शिव पूजा

– सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा की जाती है क्योंकि उन्हें वरदान प्राप्त है कि किसी भी कार्य के लिए सबसे पहले गणेश आह्वान होता है।

– पहले शिवलिंग का जल से स्नान कराएं। फिर पंचामृत (दूध, दही, शहद ,शुद्ध घी और शक्कर) से शिव जी का स्नान कराया जाता है। इसके बाद पुनः जल से स्नान करा कर उन्हें शुद्ध किया जाता है।

– अब शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं और उसके बाद जनैव ( जनेऊ) पहनाया जाता है।

– शिव भगवान पर कुमकुम और सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता। बल्कि अबीर अर्पण किया जाता है।

– इसके बाद बेलपत्र अकाव के फूल धतूरे का फूल और फल चढ़ाना चाहिए। शमी के पत्र का भी महत्व है इसलिए इसे जरूर चढ़ाय।

– धतूरे एवं बेलपत्र से शिव जी को खुश किया जाता है एवं शमी के पत्र को स्वर्ण तुल्य माना जाता है।

– इस पूर्ण प्रक्रिया के दौरान ‘ ॐ नमः शिवाय ‘ का जाप करते रहे।

– इसके बाद माता गौरा का पूजन किया जाता है।

कुल मिलाकर सावन माह प्रेम और अपनेपन को दर्शाता है। सावन में हिंदू धर्म में पूजा का विशेष महत्व है। इसलिए सावन में मांसाहार खाना वर्जित माना गया है। कहते हैं सावन में लोग प्याज लहसुन भी नहीं खाते। वही कई पुरुष सावन में दाढ़ी एवं बाल कटवाना भी गलत मानते हैं। सावन में भगवान शिव के सभी ज्योतिर्लिंगों में रथयात्रा निकलती है वही महीने के आखिरी सोमवार को शिवजी की बारात निकाली जाती है जिसमें नंदी भी शामिल होते है। इसके अलावा घर में भजन शिव अभिषेक और सत्यनारायण की कथा भी की जाती है।

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