4 कारण जिनकी वजह से फॅमिली प्लानिंग (Family planning) जरूरी है

1- शिशु मृत्यु दर के खतरे को कम करना- डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दो बच्चों के बीच में अंतर रखने के कारण जन्मजात बच्चे की असामयिक मृत्यु का खतरा कम हो जाता है। दो बच्चों के जन्म में अंतराल होने से माताओं को सामान्य और स्वस्थ होने होने के लिए समय मिल जाता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर से कम हुए पोषक तत्व पुनः वापस आ जाते हैं। आपको बता दें कि यदि कोई महिला 1 साल के अंतराल में ही दूसरे बच्चे के लिए गर्भवती होती है तो गर्भ में पल रहे बच्चे को पर्याप्त पोषक तत्व प्रदान करने में सफल नहीं होती।

2 – यौन संबंधित रोगों से सुरक्षा यानि Sexually Transmitted diseases (STD) – फैमिली प्लानिंग के चलते अनैतिक गर्भधारण से बचने के लिए गर्भ निरोधक उपाय और गोलियों का प्रयोग करना उतना ही उचित है। जितना सिफलिस एड्स आदि जैसे घातक एवं संक्रमित रोगों को रोकने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि लैंगिक बीमारियों की वजह से शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है।

3 – विकलांग बच्चे पैदा होने का खतरा कम होता है – बिना फैमिली प्लानिंग के चलते यदि गर्भधारण होता है तो उसका असर गर्भ में पल रहे बच्चे को मिलने वाले पोषक तत्व की मात्रा पर पड़ता है। दरअसल दिमागी और मानसिक रूप से आप बच्चे के लिए तैयार नहीं होते हैं। जिसकी वजह से बच्चे को मिलने वाला पोषक तत्व कम हो जाता है। ऐसे में अस्वस्थ, अक्षम या फिर विकलांग बच्चे पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है।

4 – किशोर अवस्था में गर्भ धारण का असर बच्चा और माता दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ता है – राष्ट्रीय स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं में स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं इसलिए पैदा होती हैं ,क्योंकि वह 18 साल से कम उम्र में ही गर्भ धारण कर लेती है। परिवार नियोजन की वजह से महिलाओं को स्वस्थ रहने और उनकी इच्छाओं और भविष्य की योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिलती है।

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