जीएसटी से सरकार को इस तरह होगा 55 हजार करोड़ का फायदा, जिसे इन राज्यो को दिया जायेगा

 

जीएसटी लागू होने के बाद माना जा रहा है कि राज्यों को राजस्व में कुछ नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई केंद्र सरकार करने का सोच रही है। आपको बता दे की जीएसटी यानि वस्तु और सेवा कर लागू होने के बाद मौजूदा वित्त वर्ष में केंद्र को केवल उपकर (सेस) से ही 55 हजार करोड़ रुपए के फायदे की उम्मीद है। समाचार एजेंसी पीटीआई के माध्यम से जानकारी मिली है कि सरकार को कोयले और विलासिता जैसी वस्तुओं पर लगने वाले से करीबन 55 हजार करोड रुपए की आमदनी हो सकती है। वहीं सरकार को उम्मीद है कि इस आमदनी से जीएसटी की वजह से राज्यों को होने वाले नुकसानों की भरपाई की जा सकती है।

बताया जा रहा है कि राजस्व विभाग के आकलन के अनुसार मौजूदा वित्त वर्ष में कोयले पर लगने वाले उपकर से सरकारी खजाने को करीबन 22 हजार करोड रुपए का लाभ होगा। वही तो तंबाकू पर लगाए जाने वाले ऊपर के माध्यम से खजाने को 16 हजार करोड़ रुपए की कमाई होने की संभावना है। इसके अलावा पान मसाला, मीठे पेय पदार्थ और मोटर वाहन पर लगने वाले सेस से केंद्र सरकार को करीबन 17 हजार करोड रुपए मिलने की उम्मीद है। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने बताया था ” हमने इसे ध्यान में रखते हुए ही उपकार का निर्धारण किया है इसलिए हमने छोटी कारों पर ही उपकर लगाया है।”

सरकारी सूत्रों से जानकारी मिली है कि राजस्व विभाग को उम्मीद है कि मौजूदा वित्त वर्ष में जीएसटी से होने वाले नुकसान की भरपाई करने के बाद भी सेस से प्राप्त हुए राजस्व धन में जरूर कुछ ना कुछ बचेगा। इसलिए कि बड़े राज्यों के राजस्व में कमी होने की संभावना नहीं है। यदि किसी राज्य को नुकसान होगा तो वह छोटे राज्य होंगे। जीएसटी के प्रावधानों के अनुसार यदि मुआवजा देने के बाद भी प्राप्त हुए धन में कुछ बचता है तो चुनिंदा वस्तुओं और सेवाओं पर उपकर या कर की दर में कमी करना चाहिए।

वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद में जो फार्मूला तैयार किया है। उसके अनुसार राज्यों को पहले 5 साल तक जीएसटी से हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा। वही उम्मीद जताई जा रही है कि अगले 5 सालों के दौरान अधिकतर राज्यों में राजस्व में 14 प्रतिशत तक वृद्धि हो जाएगी।

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